हैड़ाखान बाबाजी डिजिटल पुस्तकालय

ॐ नमः शिवाय

oṃ namaḥ śivāya

हैड़ाखान बाबाजी की दुर्लभ शिक्षाएँ — संगृहीत और सहेजी हुई।

महावतार बाबाजी पर दुर्लभ पुस्तकों का एक शांत संग्रह — स्कैन की गईं, ध्यानपूर्वक लिप्यंतरित, और उनके लिए सुपाठ्य बनाई गईं जो देवनागरी नहीं पढ़ पाते। कुछ का अनुवाद यहाँ हुआ है; कुछ पहले के हाथों का कार्य है, जिन्हें संगृहीत कर उन्हीं के नाम के साथ रखा गया है। निःशुल्क उपलब्ध।

देहरी पार कीजिए

नवीनतम संस्करण

विशेष पुस्तक


०१ — वे कौन हैं

बाबाजी का परिचय

श्री भगवान् का अखण्ड लीला प्रवाह सतत निर्वाध रूप से चलता ही रहता है । विषम गुणमयी लीला तरंग सृष्टिसागर का सहज रूप है । परस्पर विरोधीनी लीला शक्ति से हम सब प्राणीवर्ग सदैव नियन्त्रित रहते हैं । अनेकों पाशों से आबद्ध जीवन संसार चक्र में पथभ्रष्ट हो चक्कर खाता रहता है । प्रत्येक प्राणी सुख चाहता है परन्तु जिन कर्मों से सुख होगा उन कर्मों को वह त्याग देता है । किंकर्तव्य विमूढ हो जाता है, कोई व्यवस्थित चेतना उसके हृदय में ठहर नहीं पाती है, जैसे पथिक को दिशा का भ्रम हो जाये तो लक्ष्य स्थान पर पहुँचना उसके लिये नितान्त असम्भव हो जाता है, वैसे ही त्रिगुणमयी सृष्टि के प्रचण्ड प्रवाह में प्रवाहमान जीव इस दुस्तर संसार सागर सो पार हो जाए यह भी कठिन है ।

जब प्राणी- ''अमृतस्य पुत्रा:'' जीव स्वसंवेदन विस्मृत कर अनात्म जड़ पदार्थों के प्रति आसक्त होने लगता है, मानव जीवन का लक्ष्य जब केवल भौतिक भोग ही शेष रह जाता है, मिथ्याचार एवं दुराचार अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच जाते हैं । शास्त्र सम्मत सर्वाभीष्ट फल देने वाली साधनाओं के प्रति अरुचि उत्पन्न होने लगती है । आस महापुरुषों के सद्वचन पर अविश्वास बढ़ने लगता है, तब श्री भगवान् विविध शरीर धारण कर हमारा सन्मार्ग दर्शन कराते हैं । स्वयं शास्त्रों का आचरण कर अभ्युदय एवं नि:श्रेयस प्राप्ति का अचूक मार्ग हमारे लिये प्रशस्त करते हैं । महापुरुषों की आज्ञा का पालन करने के लिये सुदृढ़ प्रेरणा प्रदान करते हैं । सात्विकी श्रद्धा से रहित जीवों के हृदय में सद्भावनापूर्ण एवं चिर सुस्थिर आस्था जमाते हैं ।


०२ — उद्देश्य

यह पुस्तकालय क्या है

हैड़ाखान बाबाजी पर कुछ छोटी पुस्तकें केवल एक बार, कुछ सौ प्रतियों के संस्करण में छपीं — और फिर प्रायः लुप्त हो गईं। यह पुस्तकालय उन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए है।

कुछ को यहीं स्कैन कर, मानवीय निर्देशन में AI की सहायता से अनूदित किया जाता है। कुछ का अनुवाद हमसे बहुत पहले भक्तों और विद्वानों ने किया था, जिनका परिश्रम प्रचलन में बना रहना चाहिए; उन्हें हम संगृहीत करते हैं, स्पष्ट रूप से उनका श्रेय देते हैं, और जैसे प्राप्त हुए वैसे ही प्रस्तुत करते हैं। प्रत्येक शीर्षक बताता है कि वह किस श्रेणी का है।

जहाँ हम अनुवाद करते हैं, वहाँ प्रत्येक शीर्षक तीन रूपों में देते हैं: एक स्वच्छ पठन-संस्करण, मूल का प्रतिरूप, और उन सब स्थलों का ईमानदार लेखा जहाँ हमें संशय हुआ। कुछ छिपाया नहीं गया; सीवन भी विद्वत्ता का अंग है।


०३ — कार्यविधि एवं पारदर्शिता

ये अनुवाद कैसे बनते हैं

निःशुल्क दिया गया एक ईमानदार, अपूर्ण अनुवाद, ताले में बंद पड़े पूर्ण अनुवाद से शिक्षा की अधिक सेवा करता है।

चरण एक

पुस्तक स्कैन की जाती है

बची हुई प्रत्येक प्रति को पृष्ठ-दर-पृष्ठ अभिलेखीय विभेदन में फ़ोटोग्राफ़ किया जाता है।

चरण दो

उच्च-विभेदन OCR

देवनागरी को मशीन पढ़ती है, फिर पृष्ठ-चित्रों से मिलान किया जाता है।

चरण तीन

AI-सहायित अनुवाद

अनुवाद तैयार कर संदर्भ-ग्रंथों से मिलान किया जाता है, और जहाँ अर्थ अनिश्चित हो वहाँ चिह्न लगाया जाता है।

चरण चार

मानवीय समीक्षा हेतु सुरक्षित

कम विश्वास वाले अंश खुले रूप में दर्ज किए जाते हैं ताकि विद्वान और भक्त उन्हें तौल सकें।

यह उन संस्करणों का वर्णन है जिन्हें हम स्वयं तैयार करते हैं। दूसरों द्वारा अनूदित पाठ वैसे ही प्रस्तुत होते हैं जैसे उनके अनुवादक छोड़ गए।

“कर्मकांडीय उपयोग हेतु किसी योग्य पण्डित से परामर्श करें। यह एक पठन-संस्करण है, सद्भावपूर्वक प्रस्तुत।”